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एक यूनिकॉर्न संभावित स्टार्टअप फाउन्डर का इन्टर्न से सीईओ बनने तक का सफर
भारत का हर महत्वाकांक्षी व्यक्ति स्टार्टअप की आकर्षक दुनिया में अपनी जगह बनाना चाहता है, लेकिन यह आकर्षक दुनिया हर किसी महत्वाकांक्षी उद्यमी को समान उत्साह के साथ न तो स्वीकार करती है और न ही पुरस्कृत करती है। हाल के वर्षों में भारत पूरे विश्व में सबसे बड़े “स्टार्टअप-हब” के रूप में उभरा है। भारत में लोगों की समस्याओं का समाधान प्रदान करने के लिए बहुत सारे विचारों और उत्साह के साथ, कुछ उल्लेखनीय स्टार्टअप और व्यक्ति सामने आए हैं, जिन्होंने भारतीय बाजार में डिजिटल बदलाव लाया है। ऐसी ही एक प्रेरक यात्रा श्री रोहित वर्मा की रही है, जो एक प्रेरक उद्यमी हैं, और अपने स्टार्टअप के साथ संपूर्ण भारतीय बाज़ार को आपस में जोड़ने की इच्छा रखते हैं। इंटर्न का काम करने से लेकर एक यूनिकॉर्न संभावित स्टार्टअप के सीईओ बनने तक का उनका सफर वास्तव में भारत के युवाओं के लिए प्रेरणादायक है।
इंदौर के एक मारवाड़ी व्यवसायी परिवार में जन्मे और पले-बढ़े, रोहित का बचपन विशिष्ट वर्ग को मिलनेवाली सुविधाओं के बीच गुजरा, क्योंकि उनके परिवार का उनके दिवंगत दादाजी का शुरू किया गया एक सफल कंस्ट्रक्शन बिजनेस था। शुरू से ही, व्यापार की दुनिया को समझने और यूके में कॉरपोरेट की दुनिया में अपनी जगह बनाने में उनकी गहरी रुचि थी। इसलिए विदेश में काम करने की अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए, उन्होंने कॉलेज छोड़ने और आई.ई.एल.टी.एस. की तैयारी करने का फैसला किया। वह यूके में अपने कॅरियर को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तैयारी कर भी चुके थे, लेकिन अंतिम क्षणों में हुए बदलावों के कारण उन्हें अपनी योजनाओं को छोड़ना पड़ा। अब वे एक अनुभवहीन कॉलेज ड्रॉपआउट थे, जिसके पास भविष्य की कोई योजना नहीं थी। यह दौर उनके लिए सबसे कठिन था क्योंकि वे समझ नहीं पा रहे थे कि उन्हें आगे क्या करना चाहिए तथा इस तरह वे महीनों तक मायूसी और निराशा में डूबे रहे।
रोहित को जल्द ही एहसास हो गया कि वह हमेशा ऐसे नहीं रह सकते और उन्होंने स्वयं को इस स्थिति से बाहर निकालने का निर्णय लिया। इसलिए महीनों निराशा में डूबे रहने के बाद, उन्होंने एक इंटरव्यू दिया और सौभाग्य से एक मोबाइल ऐप डेवलपमेंट कंपनी में इंटर्नशिप हासिल कर ली। यह उनके जीवन का पहला और आखिरी इंटरव्यू था, जो उनकी जिन्दगी को बदल देने वाला साबित हुआ। टेक्नोलॉजी और इनोवेशन की इस दुनिया ने उनको चकित कर दिया और मायूसी में डूबे रहने से लेकर आइडियाज, स्टार्टअप्स, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी की दुनिया में स्वयं को भुला देने तक, उनके जीवन में एक नया मोड़ आ चुका था।
वहां उन्होंने वह सब कुछ सीखने की कोशिश की, जो वे सीख सकते थे। एक इंटर्न के रूप में, गूगल सर्च, डेटा एंट्री करने से लेकर बिजनेस डेवलपमेंट मैनेजर के रूप में संपूर्ण प्रोजेक्ट का प्रबंधन करने तक, उन्होंने कंपनी में प्रत्येक भूमिका निभायी और अनुभव हासिल किया। अपने कॉरपोरेट कार्यकाल के दौरान, उन्होंने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में स्थित विविध किस्म के उद्योगों से संबंधित 500 से अधिक स्टार्टअप्स के साथ काम किया।
रोहित कॉरपोरेट जगत में बिताए अपने दिनों को ऐसे दिनों के रूप में देखते हैं जिसने उन्हें संवारा और संभवत: जो वे सबसे अच्छा कर सकते थे, उसे करने में उन्हें सक्षम बनाया।
अपने इंटर्नशिप और कॉरपोरेट कार्यकाल में, अंतरराष्ट्रीय स्टार्टअप्स के साथ काम करने के दौरान उन्हें व्यापार जगत के बारे में काफी समझ बनी और अनुभव मिला। इस दौरान उनकी यह समझ भी बनी कि क्यों अन्य देश डिजिटल क्षेत्र में भारत से आगे चले गए। इस अनुभव से उनको भारतीय मार्केटप्लेस कॉमर्स मॉडल को बदलने का आधार मिला।
काम के दौरान उन्होंने महसूस किया कि भारत में एक डिजिटल समुदाय के रूप में कमी कहां है और टेक्नोलॉजी की मदद से वे किन समस्याओं का समाधान कर सकते हैं। और, यह अहसास उनकी उद्यमशीलता की यात्रा की शुरुआत थी।
अंत में, भारत को “डिजिटल रूप से उन्नत समुदाय” बनाने के दूरदर्शी लक्ष्य के साथ, उन्होंने देश के विकास में शामिल प्रमुख योगदानकर्ताओं के उस विशेष सेगमेंट यानी भारतीय बाजार पर ध्यान केंद्रित किया और समाधान तैयार करना शुरू कर दिया।
स्वयं रोहित ने बताया कि यह 80/20 के नियम का पालन करने का सामान्य आयडिया था, जिसका लक्ष्य भारतीय बाजार का 20% था जो भारत को डिजिटल रूप से उन्नत राष्ट्र बनाने में 80% बदलाव लाएगा।
फेसबुक समूह द्वारा किए गए एक सर्वेक्षण से पता चला है कि बाजार में 42.50 मिलियन से अधिक एसएमबी हैं और केवल 1.5 मिलियन ऑनलाइन मार्केटिंग और विज्ञापन टूल का उपयोग कर रहे हैं। इसके अलावा, 330 मिलियन भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं, और वे लोग मार्केटप्लेस और ऑफर्स की खोज के लिए विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर निर्भर रहते हैं। इसलिए इस समस्या को हल करने हेतु रोहित ने बायलोऐप इंडिया को मिलेनियल्स और जेनजेड समुदाय के ग्राहकों और व्यापारियों के लिए एक एक्सक्लूसिव प्लेटफॉर्म बनाना तय किया, क्योंकि यह समुदाय भारत का भविष्य है और अपनी पिछली पीढ़ियों की तुलना में बदलावों को जल्दी अपना लेता है। इस समुदाय के साथ, बायलोऐप इंडिया भारत में विदेशी कंपनियों द्वारा लाए गए ई-कॉमर्स को आई-कॉमर्स यानी ‘द इंडियन कॉमर्स वे’ में बदल रहा है।
रोहित के अनुसार, भारतीय कॉमर्स में टेक्नोलॉजी का आगमन अभूतपूर्व है, लेकिन भारतीय लोग डायनैमिक हैं और उन्हें अपनी खरीदारी के अनुभव को बढ़ाने के लिए भारतीय तरीके की आवश्यकता है। और इसी आवश्यकता को पूरा करने के लिए, बायलोऐप इंडिया अपने आई-कॉमर्स बिजनेस मॉडल के साथ उनके उद्धारक के रूप में मौजूद है जो भारत के कॉमर्स व्यवहार यानी एसओएसओ (सर्च ऑनलाइन शॉप ऑफलाइन) को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।
आई-कॉमर्स (इंडियन कॉमर्स) मॉडल को व्यापारी और ग्राहक समुदाय से काफी सराहना मिली है। यह प्लेटफॉर्म कमीशन-मुक्त है तथा व्यापारी और ग्राहक समुद
ाय को बाज़ार में एक-दूसरे की उपस्थिति का पता लगाने में मदद करता है। रोहित सफलतापूर्वक मिलेनियल्स और जेन जेड समुदाय के व्यापारियों और ग्राहकों को एक जगह लाने में कामयाब रहे। यह वैश्विक महामारी के दौरान खास तौर पर उपयोगी साबित हुआ। लॉकडाउन के दौरान, दुकानें बंद रहने के कारण व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ा। मायूसी, चिंता और निराशा के ऐसे समय में बाइलोएप उनके लिए उद्धारक साबित हुआ। मार्केटिंग के अपने ऑनलाइन मोड के साथ, बायलोऐप ने व्यापारियों और ग्राहकों के बीच की खाई को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
भारतीय बाज़ार की असली हस्तियों को सम्मानित करने और उनकी पहचान करने के लिए बायलोऐप इंडिया सिटी-स्पेसिफिक हाइपरलोकल बिजनेस अवार्ड्स का आयोजन कर चुका है, तथा एक टॉक शो और डिजिटल पत्रिका की मेजबानी करने की योजना बना रहा है। इस पहल को व्यापारी समुदाय ने काफी पसंद किया है।
वर्तमान में, बायलोऐप इंडिया ने भारत के 41 शहरों, 8 राज्यों और 14हजार से अधिक व्यवसायों के लिए अपनी सेवाएं दे रहा है। यह सफलता बायलोऐप इंडिया ने सिर्फ 2वर्ष की अवधि में हासिल की है, जबकि देश में दो बड़े लॉकडाउन भी लगे। अपनी राह में आने वाली बाधाओं को दूर करते हुए, यह स्टार्टअप भारत को डिजिटल रूप से उन्नत समुदाय बनाने के अपने मिशन में अजेय दिखता है।
इस यूनिकॉर्न संभावित स्टार्टअप के सीईओ के रूप में, रोहित भारत के युवाओं का नजरिया बदलना चाहते हैं और उन्हें फिल्मी सेलेब्रिटी के बजाय उद्यमियों और संस्थापकों जैसे वास्तविक जीवन में बदलाव लाने वाले लोगों से सीखने और प्रभावित होने के लिए प्रोत्साहित करना चाहते हैं। स्थानीय व्यवसायों को स्थानीय अर्थव्यवस्था के सहायक स्तंभों के तौर पर लेते हुए, रोहित यह काम भी अपने प्लेटफॉर्म से ही करने की कोशिश कर रहे हैं।
बिल्कुल नीचे से उठकर शीर्ष तक पहुंचने की जो यात्रा रोहित ने पूरी की है, वह वास्तव में युवाओं और भारत के हर उभरते उद्यमी के लिए एक प्रेरणादायक कहानी है। यह साबित करते हुए कि जिन्दगी भी एक स्टार्टअप चलाने जैसी है, स्वयं को बूटस्ट्रैप करना , इनोवेट करना और परिस्थितियां अनुकूल न होने पर भी यात्रा जारी रखना स्टार्टअप और ज़िंदगी दोनों में ज़रूरी है।


